सर्विकल स्पोंडिलोसिस – प्राकृतिक उपचार हैं ज्यादा कारगर | Treatment of Cervical Spondylitis

अगर जीवन शेली असंतुलित हो जाती है तो जिंदगी का मज़ा कम या ख़तम हो जाता है। ये कई बीमारियों को भी जनम देती है। सर्विकल स्पोंडिलोसिस गर्दन की एक ऐसी बीमारी है जो जीवन शेली असंतुलित होने पर होती है। असंतुलित जीवन शेली जैसे गर्दन को ग़लत तरीके से मोड़ना, कंधों को झुकना, लेट कर टीवी देखना, आगे की और झुक कर बैठना, सोने का ग़लत तरीका आदि। आजकल लोग जयदातर कंप्यूटर पर काम करते हैं जो सर्विकल स्पोंडिलोसिस का सबसे बड़ा कारण है। यह बीमारी 40 साल के उमर के लोगों में काफ़ी देखने को मिल रही है।सर्विकल स्पोंडिलोसिस – प्राकृतिक उपचार हैं ज्यादा कारगर।

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हमारी गर्दन में 7 छोटी छोटी हड़ियाँ होती हैं जो हमें गर्दन घूमने में मदद करती है। खराब जीवन शेली के कारण हड्डियों के बीच के जगह कम हो जाती है जिस के कारण हड्डियाँ आपस में रगड़ खाती हैं और यहीं से इसकी शूरवात होती है। पहले यह तोड़ा दर्द कंधे के नीचे होता है जो धीरे धीरे पूरे कंधे तक फैल जाता है।

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सर्विकल स्पोंडिलोसिस के लक्षण

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  • गर्दन में धीरे धीरे दर्द म्हासूस होता है।
  • अगर ध्यान नही दिया जाए तो दर्द लगातार बदता रहता है।
  • काम में कई बार मन ज़बरदस्ती लगाना पड़ता है।
  • कार्यक्षमता में कमी आती है।
  • स्वाभाव चिडचाड़ा हो जाता है।
  • चिंता और तनाव लगातार बदता रहता है।
  • बाहों में कमज़ोरी महसूस होती है।
  • गर्दन और हाथों में झंझनाहट महसूस होती है।

सर्विकल स्पोंडिलोसिस का इलाज

इस बीमारी का इलाज प्राकृतिक चिकतसा , होम्योपैथी अथवा योग के द्वारा ठीक किया जा सकता है।जैसे ही इस बीमारी के लक्षण दीखें वैसे ही डॉक्टर से संपर्क करें और कोई भी चिकतसा पद्ति उपयोग में लायें। सबसे अछा और आसान तरीका है अपनी जीवन शेली को दुरुस्त करें।इसके इलाज के लिए कुछ योगा आस्न बहुत महत्वपूर्ण हैं जैसे की – मकरासन, शवसन, मतयसन, नौकासान, इत्यादि। योगा आस्न का अभ्यास विशेषज्ञ की देख रेख में करें। जब भी आप योगा आस्न करें तो विचारों में सकारात्मकता और शुभ संकल्प होना चाहीए।

इन बातों का ध्यान दें

  • गर्मी में 12 ग्लास और सर्दियों में 7 ग्लास पानी ज़रूर पीयं।
  • सर्दियों में गर्दन को लपेट कर रखें।
  • गरम व ठंडे का सेक करें।
  • सुबह 2-3 लसून के कलियाँ पानी के साथ खायें।
  • सुबह 8 बजे तक नस्ता, 2 बजे तक लंच, और 8 बजे तक डिन्नर ज़रूर कर लें।
  • सोते वक़्त हाथों और पैरों को सीधा रखें।
  • सोने वाला बिस्तर सख़्त होना चाहीए।
  • दिन में 10-12 बार गर्दन को उपर-नीचे आगे-पीछे घुमाना चाहीए।
  • आसन या प्राणायाम ज़रूर करें।
  • हमेशा सीधा बैठें जिससे रीड के हड्‍डी सीधी रहे।
  • कुर्सी पर बैठ कर लगातार कई घाटों तक काम करने से बचें।
  • फिसियोतेरपी के मदद भी ले सकते हैं।

इनका परहेज़ करें

  • तली भूनी चीज़ें, माँस, अंडा, शराब, कोल्ड ड्रिंक्स, मैदे से बनी चीज़ें, अधिक नमक और मीठी चीज़ें का सेवन नही करना चाहीए।
  • मोटापे को कम करने या नियंत्रण में करने के लिए दवाइयों का इस्तेमाल नही करना चाहीए।
  • टीवी कम देखना चाहीए।
  • गदेदार बिस्तर पर ना सोयें।
  • भारी चीज़ों को उठाने से बचें।
  • तकिये का इस्तेमाल कम या नही करें।
  • आगे झुकने वाले योगा आसन ना करें।
  • ठंडी चीज़ों को ना खायें।
  • एक दम झटके से कोई भी कम ना करें।
अमल करें - अपनी समस्या पर खुद बार बार नकारत्मक ढंग से विचार ना तो खुद करें और ना ही किसी
 और से इस बारें में बात करें। कई बार आपके आस पास वेल लोग आपके उत्साह को कम कर देते हैं।

 

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